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एसिडिटी का इलाज और आहार

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एसिडिटी का निदान

यदि कोई व्यक्ति एसिडिटी (पेट में जलन) के लक्षणों से पीड़ित हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। एसिडिटी अनेक प्रकार की जटिलताओं का कारण बन सकती है, जो संबन्धित व्यक्ति को अधिक परेशान कर सकती हैं। अतः व्यक्ति को एसिडिटी से संबन्धित लक्षण प्रगट होने पर इसके निदान के लिए चिकित्सक की सहायता लेनी चाहिए। एक चिकित्सक रोग का निदान करने के लिए व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या तथा आहार के सेवन की जानकारी ले सकता है।

इसके अतिरिक्त अम्लता तथा इसकी जटिलताओं का निदान करने के लिए निम्न परीक्षणों की सलाह दी जा सकती है:

एक्स-रे परीक्षण – एसोफैगस और पेट की जांचा करने के लिए एक्स-रे परीक्षण की सिफ़ारिश की जा सकती है। इस परीक्षण में बेरियम घोल की भी मदद ली जा सकती है। मरीज को बेरियम घोल पिलाया जाता है, और एक्स-किरणों की मदद से इसकी गतिशीलता की जांच की जाती है।

पीएच मोनिट्रिंग इस टेस्ट के दौरान एसोफैगस को 1-2 दिनों की अवधि के लिए एक डिवाइस के साथ जोड़ा जाता है। यह डिवाइस एसिड के स्तर तथा पीएच स्तर को मापता है।

एसोफेजियल मेनोमेट्री इस परीक्षण के माध्यम से ग्रासनली में दबाव और भोजन की गतिशीलता के साथ समस्याओं की पहचान करने के लिए प्रयोग किया जाता है। अतः यह परीक्षण मुख्य रूप से एसोफैगस की मांसपेशियों के कार्य और भोजन को सामान्य रूप से स्थानांतरित करने की क्षमता को मापता है।

एंडोस्कोपी एंडोस्कोपी की मदद से ऊपरी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की जांच की जा सकती है। इस परीक्षण की मदद से डॉक्टर एसोफैगस और पेट की अस्तर में असमानताओं का पता लगा सकता है। इस परीक्षण के दौरान एक एन्डोस्कोप उपकरण को गले के माध्यम से एसोफैगस और पेट डाला जाता है, तथा श्लेष्म अस्तर के स्वास्थ्य का अध्ययन किया जाता है। बायोप्सी, बायोप्सी परीक्षण के लिए एंडोस्कोपी के दौरान पेट के ऊतक का एक छूटा सा नमूना भी लिया जा सकता है।

एसिडिटी का इलाज

एसिडिटी या इसकी जटिलताओं का निदान किए जाने के बाद, डॉक्टर द्वारा इलाज प्रक्रिया प्रारम्भ की जा सकती है। इलाज के दौरान संबन्धित व्यक्ति के हालात और रोग की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है। डॉक्टर अम्लता का इलाज करने के लिए एल्यूमीनियम, कैल्शियम या मैग्नीशियम युक्त एंटासिड दवाओं की सिफ़ारिश कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति को अम्लता की समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर द्वारा प्रोटॉन पंप इनहिबिटर का भी निर्धारण किया जा सकता है। कुछ स्थितियों मे डॉक्टर पेट में एसिड के उत्पादन को कम करने के लिए सर्जरी (वागोटोमी) की भी सिफ़ारिश कर सकता है।

एसिडिटी की रोकथाम / घरेलू उपचार

एसिडिटी की रोकथाम के लिए घरेलू उपचार काफी लाभदायक होते हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति द्वारा एसिडिटी के लक्षणों को कम करने और इसकी रोकथाम के लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जाना चाहिए:

  • मसालेदार भोजन का उपभोग न करें
  • फल और सब्जियों का अधिक सेवन करें
  • कम मात्रा में भोजन करें
  • आवश्यकता से अधिक सेवन न करें
  • छोटे, नियमित भोजन का सेवन करें
  • सोने से कुछ घंटे पहले भोजन करें
  • नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स और स्टेरॉयड जैसी दवाओं के सेवन से बचें
  • तनाव कम करें
  • खाने के तुरंत बाद विश्राम न करें
  • मांसाहारी भोजन का सेवन न करें
  • फाइबर की पर्याप्त मात्रा का सेवन करें।

एसिडिटी में क्या खाएं

एसिडिटी की समस्या से छुटकारा पाने के संबन्धित व्यक्ति द्वारा एक स्वास्थ्य आहार प्रणाली को अपनाया जाना बहुत आवश्यक होता है। जो व्यक्ति एसिडिटी की समस्या से परेशान हैं, उन्हें कुछ विशिष्ट आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। एसिडिटी को कम करने के लिए निम्न आहार के सेवन पर ध्यान दिया जाना चाहिए:

  • केले
  • तुलसी
  • ठंडा दूध
  • जीरा
  • लौंग
  • इलायची
  • पुदीना पत्तियां
  • अदरक
  • सौंफ
  • आलू
  • चावल
  • सेब, इत्यादि।

एसिडिटी में परहेज

कुछ खाद्य पदार्थ एसिडिटी के लक्षणों को ओर अधिक खराब कर सकते हैं। अतः लक्षणों को कम करने के लिए निम्न पदार्थों के सेवन से बचने का प्रयास करना चाहिए:

  • खट्टे फल
  • चॉकलेट
  • कैफीनयुक्त पेय पदार्थ या अल्कोहल
  • मसालेदार, वसा युक्त या तेल युक्त भोजन से
  • परहेज
  • लहसुन और प्याज
  • टमाटर
  • अचार, दही और इमली
  • लाल मांस, इत्यादि।