Home उत्तर प्रदेश नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन: उत्तर प्रदेश में मरने वालों की...

नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन: उत्तर प्रदेश में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हुई

22
Demonstration-against-citizenship-law,-death-toll-in-Uttar-Pradesh-rises-to-15

नयी दिल्ली/कानपुर/पटना/मंगलुरु: संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में शनिवार को और हिंसा हुई एवं कानपुर में भीड़ ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी जबकि बिहार में विपक्षी राजद के बंद के दौरान बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई तथा रेल एवं सड़क यातायात बाधित हुआ. उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में गुरुवार से हिंसा में अब तक 15 लोग मारे जा चुके हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा कि हिंसा की वारदात में 263 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जिनमें से 57 को गोलियां लगी हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने कानपुर में यतीमखाना पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया. इस दौरान जबरदस्त पथराव भी हुआ जिसमें पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए. पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे.
रामपुर जिले से भी झड़प की खबर है. राष्ट्रीय राजधानी में पुरानी दिल्ली और सीमापुरी के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गयी थी. दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह जामा मस्जिद से निकलने पर भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को हिरासत में ले लिया. उन्होंने शुक्रवार को वहां संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रर्शन में हिस्सा लिया था. उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. दरियागंज हिंसा के संबंध में गिरफ्तार 15 लोगों को दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जबकि सीमापुरी की घटना के सिलसिले में 11 लोग एक पखवाड़े के लिए जेल भेज दिये गये.

इंडिया गेट और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के समीप शनिवार को भी प्रदर्शन हुआ. असम और पश्चिम बंगाल में स्थिति शांतिपूर्ण रही जबकि मेघालय में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गयी. असम में प्रदर्शनकारियों ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ रैलियां निकालीं. चेन्नई समेत दक्षिण भारत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए. चेन्नई में रेलवे स्टेशन पर माकपा कार्यकर्ताओं ने ट्रेनें रोकने की कोशिश की जिसे पुलिस ने विफल कर दिया. केरल में कांग्रेस ने सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया.

तमिलनाडु और केरल में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा मंगलुरू गये और उन्होंने दो व्यक्तियों के परिवारों से भेंट की जो गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस गोलीबारी में मारे गये थे. पुलिस ने केरल से भाकपा के राज्यसभा सदस्य बिनय विश्वम और पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया जिन्होंने कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन किया. संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन के बीच भाजपा के सहयोगी शिरोमिण अकाली दल ने केंद्र से नये कानून में संशोधन कर उसमें मुसलमानों को भी शामिल करने की अपील की और कहा कि धर्म के आधार पर किसी को बाहर नहीं रखा जाना चाहिए.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने केन्द्र सरकार से शनिवार को कहा कि वह संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी पर अपनी जिद छोड़कर अपने फैसले वापस ले क्योंकि अब तो सीएए और एनआरसी के विरोध में राजग में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं. आलोचनाओं से बेपरवाह भाजपा ने घोषणा की कि वह विपक्ष के ‘झूठ’ को बेनकाब करने के लिए विशेष संपर्क अभियान चलायेगी और लोगों को इस बात के लिए कानून की बारीकियां बताएगी कि यह वर्तमान नागरिकों के विरूद्ध नहीं है.

भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा अगले दस दिनों में तीन करोड़ परिवारों से संपर्क करेगी, हर जिले में रैली करेगी और देशभर में 250 से अधिक पत्रकार वार्ता करेगी. उत्तर प्रदेश के रामपुर में शनिवार को 12-18 साल के किशोरों समेत करीब 400-500 प्रदर्शनकारी ईदगाह से कुछ दूरी पर इकट्ठा हुए और पुलिस पर पथराव किया. जिलाधिकारी आंजनेय सिंह ने कहा, ‘‘झड़प के दौरान पांच प्रदर्शनकारी घायल हो गये और एक की स्थिति गंभीर है. दर्जनों अन्य लोगों को आंसू गैस के गोलों के चलते हल्की चोटें लगीं जबकि एक दर्जन पुलिसकर्मी भी पथराव में घायल हो गये.”

पुलिस के अनुसार कानपुर में हिंसा के बाद सपा विधायक अमिताभ वाजपेयी को एहतियात के तौर पर हिरासत में ले लिया गया. उनके वाहन जब्त कर लिये गये. उधर चार दिन बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के परिसर में शनिवार को फिर विरोध प्रदर्शन हुए. एएमयू के सैकड़ों शिक्षकेतर कर्मचारियों ने एएमयू शिक्षक संघ के साथ मिलकर प्रदर्शन किया. पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने शुक्रवार बताया कि प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं व बच्चों को ढाल बनाया था. बिहार में संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान शनिवार को बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई और रेल एवं सड़क यातायात बाधित रहा. प्रदर्शनकारियों ने भागलपुर, मुजफ्फरपुर और पटना के बाहरी इलाकों में सड़कों पर चल रही टैक्सियों तथा ऑटो की खिड़कियों के शीशे तोड़ तोड़ दिए और रिक्शों को क्षतिग्रस्त कर दिया.