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6 दिन पहले हो गई थी हैदराबाद एनकाउंटर की भविष्यवाणी?

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तेलंगाना रेप और मर्डर केस. 27 नवंबर की रात ये भीषण अपराध हुआ. अगली सुबह 26 साल की पशु चिकित्सक की जली हुई लाश मिली. 6 नवंबर की तड़के सुबह चारों आरोपियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई. चारों आरोपी पुलिस हिरासत में थे. 6 दिसंबर की दोपहर साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वी सी सज्जनार ने मीडिया को ब्रीफिंग देते हुए जो घटनाक्रम बताया, उसके मुताबिक-

आरोपियों ने पूछताछ के दौरान वेटनरी डॉक्टर का फोन झाड़ियों में फेंकने की बात कही थी. पुलिस के लिए वो फोन बरामद करना ज़रूरी था. फोन की खोज और क्राइम सीन रिक्रिएट करने के लिए 6 दिसंबर की सुबह तकरीबन साढ़े पांच बजे चारों आरोपियों को नेशनल हाइवे-44 के पास क्राइम सीन पर ले जाया गया. पुलिस टीम में 10 लोग थे. क्राइम सीन पर पहुंचकर आरोपियों ने लकड़ी और पत्थर से पुलिस टीम पर हमला किया. चार में से दो आरोपियों ने हथियार भी छीने. पुलिस ने पहले संयम जताया. आरोपियों से सरेंडर करने को कहा. पहले आरोपियों की तरफ से फायरिंग की गई. फिर पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की. चारों आरोपी मारे गए. पुलिस टीम के दो लोगों को सिर पर चोट आई.

इस एनकाउंटर पर कई सवाल उठ रहे हैं. जिनका ज़िक्र करते हुए इस एनकाउंटर पर फर्ज़ी होने के आरोप लग रहे हैं. इसके अलावा एनकाउंटर से जुड़े कुछ नियम भी हैं. लोग इनके आधार पर भी सवाल कर रहे हैं. क्या हैं ये बातें, नीचे पढ़िए-

एनकाउंटर से जुड़े बुनियादी नियम

hyderabad-encounter-script-of-police-action-was-allegedly-written-a-week-before-1इसका जवाब पुलिस मैनुअल में मिलता है. एनकाउंटर के लिए ज़्यादातर एक टर्म यूज़ होता है- जवाबी फायरिंग. तरीका तो ये है कि सामने से गोली चले बिना पुलिस फायरिंग नहीं कर सकती है. मतलब कोई आरोपी या दोषी भाग रहा है, तो पुलिसकर्मी उसे पकड़ने के लिए भाग सकते हैं. गाड़ी, बाइक या जहाज, जो मुनासिब हो, उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन जब तक सामने से गोली नहीं चलती है, या जानलेवा हमला नहीं किया जाता है, तब तक पुलिस गोली नहीं चला सकती है. लेकिन गोली चलाकर घायल करना और गोली चलाकर मार देना, ये दो अलग-अलग बातें हैं. पुलिस द्वारा गोली घायल करने, निहत्था करने, हथियार छीनने या रफ़्तार धीमी करने की नीयत से चलाई जाती है. लेकिन अगर पुलिस की गोली से आरोपी या दोषी की मौत होती है, तो वो केवल आत्मरक्षा के लिए ही किया सकता है. UP पुलिस के एक अधिकारी, जिनके नाम मुठभेड़ों का तमगा भी है, ने नाम न छापने की शर्त पर बताया-

अगर पुलिस की गोली किसी की जान लेती है, तो ये केवल उसी हाल में मुमकिन है, जब पुलिस को लग रहा हो कि गोली नहीं चलाई तो पुलिसकर्मियों की जान जा सकती है.

हैदराबाद एनकाउंटर से जुड़े कुछ बड़े सवाल

हैदराबाद की मुठभेड़ में कुछ सवाल उठ रहे हैं. एक तो ये कि क्या आरोपियों के हाथ में हथकड़ी नहीं थी? वो पुलिस की टीम पर हमला करने की स्थिति में कैसे आए? पुलिस कह रही है कि पहले उन्होंने लकड़ी और पत्थर से हमला किया. क्या इस समय उनके हाथ में हथकड़ी नहीं थी? अगर हां, तो क्यों? उनके हाथ से हथकड़ी क्यों और कब खोली गई? फिर सवाल उठता है कि आरोपियों ने पुलिस के हथियार कैसे छीने? क्या पुलिस पूरी तैयारी के साथ नहीं गई थी? क्या चार के मुकाबले 10 पुलिसकर्मियों का औसत ज़रूरत से कम था? क्या पुलिस सतर्क नहीं थी? क्या पुलिस से किसी तरह की लापरवाही हुई?

एक और सवाल उठ रहा है. ये कि आरोपियों को गोली कहां लगी? क्या पुलिस ने उनके पैर में गोली मारकर उनपर काबू पाने की कोशिश की पहले? क्या चारों आरोपियों को रोका नहीं जा सका? चारों के शरीर में बुलेट इंजरी कहां-कहां हैं? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कमिश्नर से पूछा गया कि पुलिस टीम ने कितने राउंड गोलियां चलाईं. मगर कमिश्नर सज्जनार ने इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया. और भी कई ऐसे सवाल थे, जिनका जवाब जांच के बाद देने की बात कही गई.

एक और एनकाउंटर…

ये साल 2008 की बात है. वारंगल में एक वारदात हुई. इंजिनियरिंग की दो लड़कियों के ऊपर तेज़ाब फेंका गया. तीन आरोपी पकड़े गए. 12 दिसंबर, 2008 की रात तीनों आरोपी पुलिस के हाथों मारे गए. बताया गया कि उन्होंने पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश की थी. इस मुठभेड़ का घटनाक्रम भी हैदराबाद में हुए एनकाउंटर से मिलता-जुलता है. उन तीनों आरोपियों को पुलिस उस जगह ले गई थी, जहां तीनों ने मोटरसाइकिल छिपाकर रखी थी. तीनों मोटरबाइक के पास पहुंचे. पुलिस बताती है कि तीनों ने बाइक में छिपाई हुई रिवॉल्वर और चाकू निकाला और पुलिस पर हमला किया. पुलिस ने बचाव में फायरिंग की और तीनों मारे गए. उस समय वारंगल के SP थे वी सी सज्जनार. जो अभी साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर हैं.

हैदराबाद के इस एनकाउंटर की भविष्यवाणी हो चुकी थी?

अंग्रेजी अख़बार ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ में 30 नवंबर को एक रिपोर्ट छपी. रिपोर्ट के मुताबिक, सज्जनार की लीडरशिप में साइबराबाद पुलिस गिरफ़्तारी और कानूनी लड़ाई से अलग रास्ता अख्तियार करने की सोच रही थी. इस रिपोर्ट में वारंगल एनकाउंटर का ज़िक्र था, जहां सज्ज्नार पर जल्दी ‘रिजल्ट देने’ का दबाव था. हैदराबाद रेप और मर्डर केस को लेकर भी लोगों में बेहद नाराज़गी थी. पुलिस पर काफी प्रेशर था.

‘डेक्कन क्रॉनिकल’ ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर छापी कि जिस समय चारों आरोपियों से पूछताछ हो रही थी, उस समय दूसरे तरीकों पर भी विचार हो रहा था. कहा गया कि इस बार भी जल्द नतीजे सामने लाने का दबाव था. ऊपर से निर्देश था कि क्राइम करने वालों की गिरफ़्तारी करो. ये खुसरफुसर भी थी कि “अरेस्ट से कुछ ज्यादा” करने पर लोगों का गुस्सा शांत हो जाएगा. अरेस्ट से ज्यादा क्या? मुठभेड़!

क़ानून की भाषा क्या है?

एनकाउंटर में मौत को लेकर कोर्ट ने कुछ ज़रूरी बातें कही हैं. 1999 में सामाजिक संस्था ‘पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़’ (PUCL) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में साल 1995-97 के दौरान मुंबई पुलिस द्वारा अंजाम दिए गए 99 मुठभेड़ों पर सवाल उठाए गए थे. इन कथित मुठभेड़ों में 135 लोगों की मौत हुई थी. साल 2014 में आदेश आया. जस्टिस R M लोढ़ा और जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने 16 बिंदुओं का दिशानिर्देश जारी किया. कहा कि अगर पुलिस मुठभेड़ में मौत होती है, तो FIR दर्ज की जानी चाहिए. मैजिस्ट्रेट जांच, मेडिकल जांच, केस की एक अलग CID टीम से जांच करवाए जाने के साथ-साथ मृत व्यक्ति के वारिस को उचित मुआवज़ा दिया जाना चाहिए. हैदराबाद एनकाउंटर में अभी ये देखना होगा कि तेलंगाना पुलिस इस ओर क्या कार्रवाई करती है?

मानवाधिकार आयोग क्या कहता है?

मार्च 1997. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC). इस बरस NHRC के तत्कालीन चेयरमैन थे जस्टिस M N वेंकटचलिया. उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को खत लिखा. कहा कि बहुत सारे राज्यों से झूठी मुठभेड़ों की शिकायतें मिल रही हैं. जस्टिस वेंकटचलिया ने लिखा कि अगर पुलिसकर्मी की गोली से कोई मारा जाता है, तो पुलिस वाले पर सजायोग्य हत्या यानी Culpable Homicide का केस दर्ज किया जाना चाहिए. ऐसा इसलिए कि पुलिस के पास किसी की भी व्यक्ति की जान लेने का कोई अधिकार नहीं है. जान ली, तो पुलिसवाले पर केस दर्ज़ करके मामले की तहकीकात की जाएगी. इस बात की जांच होगी कि पुलिसकर्मी द्वारा की गई कार्रवाई क़ानून के दायरे में है कि नहीं.