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कमर दर्द के लक्षण और कारण क्या है?

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कमर दर्द एक सामान्य समस्या है, जो किसी भी व्यक्ति के काम-काज और निजी जीवन में हस्तक्षेप कर सकती है। यह व्यक्तियों को किसी भी उम्र में ज्ञात और अज्ञात कारणों के परिणामस्वरूप उत्पन्न हो सकती है। सामान्य कमर दर्द की समस्या अत्यधिक काम करने के दौरान, कमर में मोच आने के दौरान या चोट लगने के दौरान उत्पन्न हो सकती है, तथा इसे घरेलू उपचार के तहत ठीक किया जा सकता है। लेकिन अज्ञात कारण से उत्पन्न कमर दर्द की समस्या अनेक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर संकेत कर सकती है, जिसमें रीढ़ की हड्डी का कैंसर, हर्नियेटेड डिस्क, गठिया, गुर्दे में संक्रमण या रीढ़ की हड्डी का संक्रमण आदि समस्याएँ शामिल हैं। कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति कुछ घरेलु उपचार अपनाकर तथा उचित इलाज प्राप्त कर इस समस्या से छुटकारा पा सकता है।
अतः आज इस लेख में आप जानेंगे कि कमर दर्द क्या है, इसके लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं तथा कमरदर्द के घरेलू उपचार के बारे में।

कमर दर्द क्या है

कमर दर्द या पीठ के निचले हिस्से में दर्द बहुत आम समस्या है, जो किसी भी उम्र में महिलाओं और पुरुषों को सामान रूप से प्रभावित कर सकती है। अत्यधिक काम करने के दौरान या मामूली चोट के कारण कमर दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है, लेकिन कभी-कभी इस समस्या के अनेक अस्पष्ट कारण भी हो सकते हैं। अतः कमर दर्द एक अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का भी संकेत या लक्षण हो सकती है।
कमर में दर्द की शुरुआत अचानक या हल्के दर्द के साथ धीरे-धीरे हो सकती है और दर्द की आवृति मामूली या अत्यधिक गंभीर हो सकती है। कुछ व्यक्तियों में कमर दर्द, क्रोनिक समस्या के परिणामस्वरुप भी उत्पन्न हो सकता है।
आमतौर पर कमर दर्द की समस्या उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले परिवर्तनों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है। इसका कारण यह है, कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में कशेरुक (vertebrae) के बीच स्थित तरल पदार्थ कम हो जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी में घर्षण अधिक होता है, और नुकसान पहुँचता है।

कमर दर्द के लक्षण

lower-back-pain-symptoms-in-Hindiकमर का दर्द एक स्वास्थ्य समस्या के संकेत या लक्षण के रूप में प्रगट हो सकता है, जिसे विशेष रूप से महसूस किया जा सकता है। कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति निम्न लक्षणों को भी महसूस कर सकते हैं, जैसे:
• सुन्नता या कमजोरी आना
• एक या दोनों पैरों में झुनझुनी आना या सुन्न हो जाना
• चलने और झुकने में कठिनाई होना
• गंभीर रूप से पीठ में दर्द उत्पन्न होना
• वजन घटाना
• कमर में सूजन आना
• मांसपेशियों में ऐंठन उत्पन्न होना
• पैरों की संवेदनशीलता में कमी आना
• बुखार आना और ठंड लगना, इत्यादि।

कमर दर्द का कारण

कमर दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं, कुछ सामान्य होते है तो कुछ गंभीर। कमर दर्द के कारणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:
मोच और तनाव (Sprains and strains) – अचानक कमर मुड़ने या किसी भी गतिविधि के दौरान कमर में तनाव या दबाव पड़ने से कमर दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। अतः पीठ के निचले हिस्से में दर्द का एक सामान्य कारण मोच और खिंचाव हैं। अत्यधिक काम के दौरान, खेलते समय, या कुछ भारी सामान उठाते समय कमर में मोच आ सकती है।
चोट (Injuries) – कमर में जोड़दार चोट लगने से कशेरुक फ्रैक्चर और टूटी हुई डिस्क (ruptured discs) के रूप में कमर दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कमर में चोट के संभावित कारणों में गिरना, वाहन दुर्घटना और खेल के दौरान चोट लगना, इत्यादि को शामिल किया जा सकता है। कमर में चोट लगने के तुरंत बाद दर्द को महसूस किया जा सकता है।
कॉडा इक्विना सिंड्रोम (Cauda equina syndrome) – काउडा एक्विना सिंड्रोम एक दुर्लभ स्थिति है, जो काउडा एक्विना को नुकसान पहुंचने के दौरान उत्पन्न होती है। काउडा एक्विना रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में नसों का एक समूह होता है। यह स्थिति आम तौर पर एक हर्नियेटेड डिस्क (herniated disc) के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है, लेकिन काउडा एक्विना सिंड्रोम के अन्य कारणों में निम्न को भी शामिल किया जा सकता है, जैसे:
• रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर
• रीढ़ की हड्डी में संक्रमण
• रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर
• स्पाइनल सर्जरी, इत्यादि।
संक्रमण (Infections) – रीढ़ की हड्डी और आसपास के ऊतक कभी-कभी हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या कवक (fungi) से संक्रमित हो सकते हैं। शरीर के अन्य हिस्सों से संक्रमण रीढ़ की हड्डी तक पहुँच सकता है। रीढ़ की हड्डी की सर्जरी, मधुमेह, कैंसर और एचआईवी जैसी स्थितियों की जटिलताओं के रूप में भी रीढ़ की हड्डी में संक्रमण की स्थिति विकसित हो सकती है। रीढ़ की हड्डी के संक्रमण में वर्टिब्रल ऑस्टियोमाइलाइटिस (vertebral osteomyelitis) और रीढ़ की हड्डी में फोड़ा (spinal epidural abscess) इत्यादि शामिल हैं।
साइटिका (Sciatica) – साइटिका, पीड़ित व्यक्ति में नितंब की तंत्रिका संकुचित हो जाने के कारण तेज कमर दर्द का कारण बनता है, तथा यह दर्द नितंबों से होता हुआ पैरों तक प्रगति करता है। साइटिका के कारणों में स्पाइनल स्टेनोसिस (spinal stenosis) और टूटी हुई डिस्क (ruptured disc) आदि शामिल हो सकते हैं। कमर दर्द के अतिरिक्त साइटिका के लक्षणों में पीठ में अकड़न, प्रदाह और पैर के नीचे झुनझुनी इत्यादि शामिल हैं।
असामान्य रीढ़ की वक्रता (Abnormal Spine Curvatures) – स्कोलियोसिस (Scoliosis), कुबड़ापन (kyphosis) और लॉर्डोसिस (lordosis) सभी स्थितियां रीढ़ की हड्डी में असामान्य वक्रता का कारण बनती हैं। असामान्य वक्रता की स्थिति में मांसपेशियों, टेंडन (tendons), स्नायुबंधन और कशेरुकाओं पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी में विकृति उत्पन्न होती है।

महिला में कमर दर्द का कारण

महिलाओं में निम्न प्रकार की स्थितियां कमर दर्द का कारण बन सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
• गर्भावस्था
• एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis)
• ओवेरियन सिस्ट (ovarian cysts)
• गर्भाशय फाइब्रॉएड (uterine fibroids), इत्यादि।

कमर दर्द के अन्य कारण

अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी व्यक्ति में कमर दर्द के लक्षण उत्पन्न होने का कारण बन सकती हैं। इन स्थितियों में शामिल हैं:
• गठिया (arthritis)
• फाइब्रोमायल्गिया (fibromyalgia)
• स्पॉन्डिलाइटिस (spondylitis) – रीढ़ की हड्डियों के बीच जोड़ों में सूजन की स्थिति
• स्पोंडिलोसिस (spondylosis)
• किडनी और मूत्राशय की समस्याएं
• रीढ़ की हड्डी का कैंसर, इत्यादि।

महिला में कमर दर्द का कारण

What-is-lower-back-pain-in-Hindiमहिलाओं में निम्न प्रकार की स्थितियां कमर दर्द का कारण बन सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
• गर्भावस्था
• एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis)
• ओवेरियन सिस्ट (ovarian cysts)
• गर्भाशय फाइब्रॉएड (uterine fibroids), इत्यादि।

कमर दर्द के लिए डॉक्टर को कब दिखाना है

कमर दर्द का कोई एक स्पष्ट कारण नहीं होता है, और यह दर्द कुछ स्थितियों में अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति की कमर में दर्द अत्यधिक गंभीर है और दर्द के अलावा अन्य लक्षणों को भी महसूस किया जाता है, तो इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर की सिफारिश लेनी चाहिए। अतः कमर दर्द से सम्बंधित निम्न स्थितियों में व्यक्ति को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, जैसे कि:
• पैरों के नीचे झुनझुनी या सुन्नता उत्पन्न होने पर
• चलने या पैर हिलाने में कठिनाई महसूस होने पर
• आंत्र या मूत्राशय सम्बन्धी कार्यों में कमी आने पर
• बहुत तेज दर्द उत्पन्न होने पर, इत्यादि।

कमर दर्द के जोखिम कारक

:- कुछ प्रमुख कारण कमर दर्द के विकास को बढ़ाने में सहायक होते हैं जिनमें शामिल हैं:
:- उम्र – कमर दर्द की समस्या सर्वाधिक 30 या 40 वर्ष की उम्र के व्यक्तियों में को अधिक प्रभावित करती है।
:- व्यायाम की कमी – व्यायाम की कमी रीढ़ की हड्डी के कमजोर होने का कारण बनती है, जिससे कमर दर्द का जोखिम बढ़ जाता है।
:- अधिक वज़न – शरीर का अतिरिक्त वजन रीढ़ की हड्डी और कमर पर दबाव डालता है, जिससे कमर में मोच की संभावना बढ़ जाती है।
:- रोग – व्यक्ति में आंतरिक रोग या समस्याएँ भी कमर दर्द के जोखिम को बढाती हैं जिनमें गठिया और कैंसर शामिल हैं।
:- अनुचित भार उठाना – पैरों के बजाय कम के बल भार उठाने का अनुचित तरीका व्यक्तिओ को कमर दर्द के जोखिम में दाल सकता है।
:- मनोवैज्ञानिक स्थिति – मनोवैज्ञानिक स्थिति जैसे- अवसाद और चिंता से ग्रस्त व्यक्ति भी कमर दर्द का सिकार हो सकते हैं।
:- धूम्रपान – निकोटीन स्पाइनल डिस्क (spinal discs) के क्षतिग्रस्त होने और रक्त प्रवाह में कमी का कारण बनता है। अतः धुम्रपान की स्थिति भी रीढ़ की डिस्क तक पर्याप्त पोषक तत्व पहुंचाने से रोक सकती है, और कमर दर्द का कारण बन सकती है।