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स्पर्म लीकेज (वीर्य रिसाव) क्या है, और इसके कारण क्या है?

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स्पर्म लीकेज की समस्या एक सामान्य समस्या है, जो युवाओं को 20 बर्ष की उम्र के आसपास अधिक प्रभावित करती है। कभी कभी स्पर्म लीकेज होना कोई चिंता का विषय नहीं होता है लेकिन यदि बार बार स्पर्म लीकेज होता है तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है जिसके कारण इसका इलाज किया जाना आवश्यक हो जाता है। इसके अतिरिक्त वीर्य का रिसाव कभी-कभी यौन संचारित रोग का संकेत हो सकता है। वीर्य रिसाव पीठ दर्द, बालों का झड़ना और अंडकोष में दर्द आदि लक्षणों के उत्पन्न होने का कारण भी बन सकता है।
अतः आज इस लेख में आप जानेंगे कि स्पर्म लीकेज क्या है, इसके कारण और ट्रीटमेंट के बारे में।

स्पर्म लीकेज (वीर्य रिसाव) क्या है

स्पर्म लीकेज (वीर्य रिसाव) पुरुषों में उत्पन्न होने वाली एक समस्या है, जिसके तहत बिना किसी यौन उत्तेजना के किसी भी समय लिंग से वीर्य का रिसाव होता है। जब किसी पुरुष में जननांग उत्तेजना के दौरान स्खलन होता है, तो लिंग से निकलने वाला सफ़ेद तरल पदार्थ वीर्य (स्पर्म) कहलाता है। स्पर्म मुख्य रूप से सेमिनल द्रव से बना है, जिसका निर्माण प्रोस्टेट और वीर्य पुटिका द्वारा होता है। वीर्य पुटिका, प्रोस्टेट के पीछे स्थित एक छोटी ग्रंथि है। वीर्य में कुछ मात्रा में शुक्राणु उपस्थित होते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है, कि वीर्य सेक्स या हस्तमैथुन के दौरान केवल लिंग से बाहर आता है। लेकिन कभी-कभी बिना यौन उत्तेजना के व्यक्ति के लिंग से वीर्य का रिसाव हो सकता है, जो कि चिकित्सकीय समस्या का संकेत भी हो सकता है। यौन क्रिया के दौरान वीर्य का रिसाव या स्पर्म लीकेज होना एक सामान्य घटना है। लेकिन कुछ चिकित्सकीय स्थितियां ऐसी भी हैं, जिनके कारण लिंग से वीर्य का रिसाव हो सकता है। अतः इन चिकित्सकीय कारणों का इलाज प्राप्त कर स्पर्म लीकेज की समस्या से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है, जबकि स्पर्म लीकेज के अन्य कारण बिना किसी चिकित्सा समस्या से सम्बंधित हो सकते हैं। वीर्य रिसाव सबसे आम समस्या में से एक है जो पुरुषों को प्रभावित करती है। ऐसे कई उदाहरण हैं जब स्पर्म, वीर्य या शुक्राणु के रिसाव की संभावना अधिक हो जाती है, जैसे कि पेशाब के दौरान, बाथरूम का उपयोग करते समय और जब आपकी सेक्स ड्राइव (उत्तेजना) अधिक हो रही हो तब। क्योंकि शुक्राणु का रिसाव कभी-कभी यौन संचारित रोग का संकेत हो सकता है।

पेशाब के बाद वीर्य का रिसाव होंना

पेशाब के बाद स्पर्म लीकेज एक सामान्य स्थिति है, जो कुछ पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। हालाँकि यह लक्षण आमतौर पर हानिरहित होता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को लगता है, कि पेशाब के बाद लीक होने वाला तरल पदार्थ वीर्य नहीं है, बल्कि किसी चोट या संक्रमण से संबंधित निर्वहन है, तब इस स्थिति में सम्बंधित व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालाँकि पेशाब के बाद स्पर्म लीकेज की स्थिति का कारण प्रतिगामी स्खलन (रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन) भी हो सकता है। रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की स्थिति में वीर्य, लिंग से बाहर निकलने के बजाय मूत्राशय में प्रवेश करता है। यह समस्या आमतौर धुंधले मूत्र का कारण बनती है।
यदि किसी व्यक्ति को कभी-कभी पेशाब के बाद वीर्य का रिसाव होता है, तो उसे किसी भी प्रकार के उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यदि यह समस्या बार-बार उत्पन्न होती है, तो डॉक्टर का परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है। विभिन्न कारक पेशाब के दौरान शुक्राणु के रिसाव की समस्या में योगदान कर सकते हैं, और ये कारण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं। हालांकि अत्यधिक हस्तमैथुन को इसके कारण के रूप में स्वीकार किया जाता है, प्रतिगामी स्खलन जहां वीर्य मूत्राशय में जाता है, तब अक्सर वीर्य रिसाव होता है। अन्य चिकित्सा समस्याएं जैसे कि जननांग अंगों की विकृति, जस्ता की कमी, मूत्रजननांगी प्रणाली का संक्रमण और शराब का सेवन भी वीर्य के रिसाव का कारण है। धूम्रपान को कम करना, शराब का उपयोग कम करना और सबसे महत्वपूर्ण बात, इस समस्या को कम करने के लिए आपको हस्तमैथुन को कम करना होगा।

साथी के साथ बातचीत के दौरान वीर्य का रिसाव होना

कुछ पुरुष अपने साथी के साथ बातचीत करते समय भी वीर्य का रिसाव महसूस करते हैं। यह सेक्स से ठीक पहले या सेक्स के बाद या बस अपने साथी से बात करते समय हो सकता है। इसका सटीक कारण ज्ञात नहीं है, और वीर्य के रिसाव की मात्रा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है। यदि महिला इसके संपर्क में आती है तो महिला साथी एसटीआई विकसित कर सकती है या गर्भवती हो सकती है। यौन उत्तेजना को नियंत्रित करने के अलावा, शुक्राणु रिसाव को रोकने के लिए व्यावहारिक रूप से कोई रास्ता नहीं है। किसी भी तरह की अवांछित घटना से बचने के लिए शुरुआत से ही कंडोम का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है।

बाथरूम का उपयोग करते समय वीर्य का रिसाव

पुरुषों द्वारा सामना की जाने वाली एक और आम समस्या है मल त्याग के दौरान वीर्य का स्त्राव। वीर्य के उत्पादन की प्रक्रिया निश्चित है और वीर्य के एक निश्चित स्तर के उत्पादन में अंडकोष सहायता करता है, जबकि प्रोस्टेट ग्रंथि इसका अधिकांश उत्पादन करती हैं। जब नसें कमजोर हो जाती हैं, या प्रोस्टेट ग्रंथि सिकुड़ जाती है, तो शौचालय का उपयोग करते समय शुक्राणुओं का रिसाव हो सकता है। इसके सबसे सामान्य कारणों में अक्सर हाथ का अभ्यास (हस्तमैथुन), स्खलन के बिना लगातार उत्तेजना और अक्सर कामुक विचारों में लिप्त रहना होता है। इस मुद्दे पर अंकुश लगाने के विभिन्न प्राकृतिक साधन हैं, हालांकि बाथरूम का उपयोग करते समय वीर्य रिसाव को कम करने के लिए स्वस्थ आदतों को अपनाना सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
हालांकि किसी भी व्यक्ति को अवांछित वीर्य स्राव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, यह आमतौर पर उन लोगों में देखा जाता है जो कामुक विचारों में डूब जाते हैं या बहुत अधिक हस्तमैथुन करते हैं। इसलिए इस शर्मनाक समस्या से छुटकारा पाने के लिए इन्हें कम करने का सुझाव दिया गया है।

स्पर्म लीकेज के लक्षण

स्पर्म लीकेज के कारणों के आधार पर अनेक प्रकार के लक्षणों को महसूस किया जा सकता है। अपितु स्पर्म लीकेज की स्थिति में व्यक्ति बगैर यौन उत्तेजना के किसी भी समय वीर्यपात कर सकता है। कुछ व्यक्ति स्पर्म लीकेज के साथ-साथ अन्य लक्षणों को भी महसूस कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-
• पीठ दर्द
• बालों का झड़ना
• अंडकोष में दर्द
• शीघ्रपतन
• पेनिस में कमजोर इरेक्शन
• व्यवहार परिवर्तन, इत्यादि।

स्पर्म लीकेज का कारण

यौन उत्तेजना के दौरान लिंग से वीर्यपात या स्पर्म लीकेज होना सामान्य बात है, लेकिन यौन उत्तेजना के बगैर स्पर्म लीकेज की समस्या कुछ अन्य समस्याओं की ओर संकेत कर सकती है। अतः सचेतन यौन उत्तेजना के अलावा, स्पर्म लीकेज (वीर्य रिसाव) के अन्य सामान्य कारणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:
• जननांग अंगों की विकृति
• जिंक की कमी
• क्रोनिक संक्रमण
• शराब का दुरुपयोग
• अत्यधिक हस्तमैथुन
इसके अलावा स्पर्म लीकेज के कुछ विशिष्ट कारण भी हो सकते हैं, जैसे:
• स्वप्नदोष
• दवा का दुष्प्रभाव
• प्रोस्टेट की समस्या
• तंत्रिका की चोट, इत्यादि
इन कारणों के अनेक लक्षण और संकेत हो सकते हैं। अतः स्पर्म लीकेज के लक्षणों के बारे में जानना और अंतर्निहित कारणों का इलाज करना अत्यंत आवश्यक होता है।

स्पर्म लीकेज का कारण है कामोत्तेजना

कामोत्तेजना शारीरिक या मानसिक स्थिति से समबन्धित समस्या है, जिसके तहत वीर्य का रिसाव यौन उत्तेजना या केवल यौन विचार के कारण होता है। अतः इस समस्या में स्खलन या तो शारीरिक या फिर मानसिक उत्तेजना की कमी के साथ होता है। कामोत्तेजना की समस्या एक अंतर्निहित बीमारी के कारण उत्पन्न हो सकती है, जिसमें मधुमेह या संवहनी रोग शामिल हैं। यह बीमारियाँ जननांगों से जुडी शारीरिक भावना को कम करती हैं। इसके अतिरिक्त हार्मोनल असंतुलन, कुछ दवाओं और रिश्तों में तनातनी के मामले भी कामोत्तेजना का कारण बन सकते हैं और वीर्य रिसाव (स्पर्म लीकेज) कर सकते हैं। स्पर्म लीकेज की समस्या में सम्बंधित व्यक्ति शीघ्रपतन का अनुभव कर सकता है, जो कि एक अंतर्निहित स्थिति की ओर संकेत है। हालांकि शीघ्रपतन के ज्यादातर मामले मनोवैज्ञानिक कारणों से सम्बंधित होते हैं।

स्पर्म लीकेज का कारण स्वप्नदोष

नोक्टुर्नल एमिशन की समस्या को “वेट ड्रीम” के रूप में भी जाना जाता है, यह समस्या किशोरावस्था के दौरान और कभी-कभी व्यक्ति के 20 के दशक में सबसे आम है। इस समस्या के तहत अधिकांश पुरुष रात के समय स्पर्म लीकेज का अनुभव करते हैं। स्वप्नदोष या नोक्टुर्नल एमिशन रात में सोते समय वीर्य का अनैच्छिक रूप से स्खलन होना है। यह समस्या बेडशीट या यौन सपनों के माध्यम से जननांग उत्तेजित होने के कारण वीर्यपात का कारण बनती है। अधिक संभोग करने या हस्तमैथुन करने के कारण भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। अधिकांश पुरुषों को नोक्टुर्नल एमिशन के लिए किसी भी प्रकार के उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ या 20 से अधिक होने पर यह समस्या आमतौर पर कम हो जाती है।

दवा के साइड इफेक्ट के कारण स्पर्म लीकेज होना

एंटीडिप्रेसेंट, मूड स्टेबलाइजर्स और कुछ हार्मोन उपचारक दवाओं के साइड इफ़ेक्ट के कारण भी सम्बंधित व्यक्ति को वीर्य रिसाव (स्पर्म लीकेज) की समस्या उत्पन्न हो सकती है। सेलेक्टिव सेरोटोनिन रूप्टेक इनहिबिटर, जो कि एंटीडिपेंटेंट्स ड्रग है, यह वीर्य रिसाव और अन्य यौन सम्बन्धी दुष्प्रभावों का कारण बन सकता है, जिनमें कम कामेच्छा देरी से स्खलन और स्तंभन दोष आदि शामिल हैं। ये दुष्प्रभाव ड्रग के प्रकार, खुराक और अन्य दवाओं के साथ संयोजन पर निर्भर करते हैं। अवसाद का इलाज करने में मनोचिकित्सा और दवा दोनों प्रभावी विकल्प हैं। यदि एंटीडिप्रेसेंट दवा के सेवन के दौरान किसी व्यक्ति को यौन दुष्प्रभाव से सम्बंधित समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से परामर्श प्राप्त करना चाहिए। कुछ मामलों में, व्यक्ति द्वारा ली जाने वाली दवाओं की खुराक को समायोजित करने या किसी अन्य दवा द्वारा स्थानांतरित करने की आवश्यकता पड़ सकती है। डॉक्टर की अनुमति के बगैर या अन्य एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के सेवन पर रोक नहीं लगानी चाहिए।

वीर्य रिसाव का कारण प्रोस्टेट समस्याएं

प्रोस्टेट ग्रंथि से सम्बंधित समस्याओं के कारण भी स्पर्म लीकेज की समस्या उत्पन्न हो सकती है। प्रोस्टेट ग्रंथि वीर्य का उत्पादन करने के साथ-साथ वीर्य को मूत्रमार्ग के माध्यम से लिंग से बाहर निकलने में मदद करती है। हालाँकि प्रोस्टेट कई स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ सकता है, जिनमें प्रोस्टेटाइटिस और प्रोस्टेट कैंसर की समस्याएँ प्रमुख है।
प्रोस्टेटाइटिस को प्रोस्टेट की सूजन और वृद्धि के रूप में जाना जाता है। इसके प्रमुख कारणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:
• जीवाणु संक्रमण
• तंत्रिका की चोट
• प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और सूजन को ट्रिगर करने वाला कोई भी पदार्थ,
प्रोस्टेट कैंसर का मुख्य कारण अभी भी अज्ञात है। हालांकि, कुछ आनुवंशिक परिवर्तन इस समस्या को ट्रिगर करते हैं। प्रोस्टेटाइटिस और प्रोस्टेट कैंसर जैसी अन्य प्रोस्टेट समस्याओं की स्थिति में वीर्य रिसाव के अलावा निम्न लक्षण भी प्रगट हो सकते हैं, जैसे:
• पेशाब करने में कठिनाई
• श्रोणि क्षेत्र में दर्द
• स्खलन में परिवर्तन
• वीर्य में खून की उपस्थिति

स्पर्म लीकेज का कारण तंत्रिका की चोट

जब किसी व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र में किसी प्रकार की चोट लगती है या क्षति पहुँचती है, तो वह व्यक्ति स्खलन में परिवर्तन और वीर्य रिसाव का अनुभव कर सकता है। अनेक कारक स्खलन में शामिल नसों को प्रभावित कर तंत्रिका क्षति का कारण बन सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
• अधिक उम्र,
• रीढ़ की हड्डी या कमर की चोट और सर्जरी
• सूजन या संक्रमण
• कैंसर उपचार, इत्यादि।
चूँकि स्खलन होने के लिए मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों के बीच उचित पारस्परिक क्रिया होनी चाहिए। तंत्रिका और नसों को प्रभावित कर यौन कार्यों में बदलाव उत्पन्न करने वाली चिकित्सकीय स्थितियों में निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:
• मधुमेह
• स्ट्रोक
• मल्टीपल स्केलेरोसिस
तंत्रिका की चोट और अन्य अंतर्निहित कारणों का इलाज कर स्पर्म लीकेज में सुधार लाया जा सकता है।